Ayurveda Promoter

22/03/2017

महिलाओं में ज्यादा हार्ट अटैक का खतरा

सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। जरूरी नहीं है कि सीने का दर्द हार्ट अटैक का दर्द ही हो। हार्ट अटैक और एंजाइना सबसे गंभीर कारण होता है। अगर आप चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं और आपके सीने में दर्द हो रहा हो तो इस हालत में इस दर्द को हृदय रोग ही माने।

भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लिए हार्ट अटैक ज्यादा खतरनाक होता है।इसीलिए महिलाओं की मौत का मुख्य कारण हृदय रोग होता है। यह जानकारी टैगोर अस्पताल एंड हार्ट केयर सैंटर जालंधर के प्रमुख डा. विजय महाजन व वरिष्ठ काॢडयोलोजिस्ट डा. निपुण महाजन ने वीरवार को एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान दी। के द्वारा दी गई है। उनका कहना है कि महिलाओं में हृदय रोग बढऩे का मुख्य कारण जागरूकता का अभाव है। यह भी देखा गया है कि महिलाएं किसी भी बीमारी को अनदेखा कर देती हैं।उन्होंने बताया कि महिलाओं में यह बीमारी शूगर, ब्लड प्रैशर या मोटापे की वजह से भी पुरुषों से ज्यादा खतरनाक होती है और उनमें से 64 प्रतिशत की मृत्यु तुरन्त हो जाती है। डा. निपुण ने बताया कि वह महिलाओं को हृदय रोगों के बारे में जागरूक करने हेतु एक प्राइवेट कम्पनी के साथ मिलकर रोड शो व स्क्रीनिंग कैम्प आयोजित करने जा रहे हैं।

पहचाने हार्ट अटैक को-
अगर आप दिल के रोगी हैं, हाई ब्लडप्रेशर या डायबिटीज के रोगी हैं तो आपको हर वक्त अपने पास इमरजेंसी फोन नबंर रखना चाहिए।
अगर दर्द का अहसास खाना खाते वक्त हो तो खाना धीरे-धीरे और रूक-रूक कर खाएँ। और कम खाएँ, भले ही आपको बार-बार खाना पड़े।
दर्द का अनुभव होते ही जिस काम में भी आप लगे हो, उसे तुरंत रोक दें।
गर दर्द होने पर चक्कर आए या सिर में दर्द का अनुभव करें तो समझ जाइए कि आपका ब्लडप्रेशर बहुत ज्यादा लो हो गया है। इस अवस्था से बचने के लिये तुरंत नींबू नमक पानी लेना चाहिए।
दर्द का अनुभव होते ही जिस काम में भी आप लगे हो, उसे तुरंत रोक दें
#9015602121

17/11/2016

हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्याः
शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु होता जाता है लेकिन सूर्य की किरणें एकदम से इतनी प्रखर भी नहीं होती कि रस सुखाकर हमारा शोषण कर सकें। अपितु आदानकाल का प्रारम्भ होने से सूर्य की हल्की और प्रारम्भिक किरणें सुहावनी लगती हैं।
शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है। प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि ठंडी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने से जठर में सुरक्षित रहती है जिसके फलस्वरूप अधिक प्रबल हो जाती है। यह प्रबल हुई जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है। इस भभकती अग्नि को यदि आहाररूपी ईंधन कम पड़े तो वह शरीर की धातुओं को जला देती है। अतः शीत ऋतु में खारे, खट्टे मीठे पदार्थ खाने-पीने चाहिए। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए पौष्टिक, शक्तिवर्धक और गुणकारी व्यंजनों का सेवन करना चाहिए।
इस ऋतु में घी, तेल, गेहूँ, उड़द, गन्ना, दूध, सोंठ, पीपर, आँवले, वगैरह में से बने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का सेवन करना चाहिए। यदि इस ऋतु में जठराग्नि के अनुसार आहार न लिया जाये तो वायु के प्रकोपजन्य रोगों के होने की संभावना रहती है। जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो उन्हें रात्रि को भिगोये हुए देशी चने सुबह में नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खाना चाहिए। जो शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं उन्हें केले, आँवले का मुरब्बा, तिल, गुड़, नारियल, खजूर आदि का सेवन करना अत्यधिक लाभदायक है।
एक बात विशेष ध्यान में रखने जैसी है कि इस ऋतु में रातें लंबी और ठंडी होती हैं। अतः केवल इसी ऋतु में आयुर्वेद के ग्रंथों में सुबह नाश्ता करने के लिए कहा गया है, अन्य ऋतुओं में नहीं।
अधिक जहरीली (अंग्रेजी) दवाओं के सेवन से जिनका शरीर दुर्बल हो गया हो उनके लिए भी विभिन्न औषधि प्रयोग जैसे कि अभयामल की रसायन, वर्धमान पिप्पली प्रयोग, भल्लातक रसायन,शिलाजित रसायन, त्रिफला रसायन, चित्रक रसायन, लहसुन के प्रयोग वैद्य से पूछ कर किये जा सकते हैं।
जिन्हें कब्जियत की तकलीफ हो उन्हें सुबह खाली पेट हरड़े एवं गुड़ अथवा यष्टिमधु एवं त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यदि शरीर में पित्त हो तो पहले कटुकी चूर्ण एवं मिश्री लेकर उसे निकाल दें। सुदर्शन चूर्ण अथवा गोली थोड़े दिन खायें।
विहारः आहार के साथ विहार एवं रहन-सहन में भी सावधानी रखना आवश्यक है। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए तेल की मालिश करनी चाहिए। चने के आटे, लोध्र अथवा आँवले के उबटन का प्रयोग लाभकारी है। कसरत करना अर्थात् दंड-बैठक लगाना, कुश्ती करना, दौड़ना, तैरना आदि एवं प्राणायाम और योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, सूर्यस्नान एवं धूप का सेवन इस ऋतु में लाभदायक है। शरीर पर अगर का लेप करें। सामान्य गर्म पानी से स्नान करें किन्तु सिर पर गर्म पानी न डालें। कितनी भी ठंडी क्यों न हो सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। रात्रि में सोने से हमारे शरीर में जो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है वह स्नान करने से बाहर निकल जाती है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है।
सुबह देर तक सोने से यही हानि होती है कि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय, शुक्राशय आदि अंगों पर अपना खराब असर करती है जिससे अलग-अलग प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से इन अवयवों को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखा जा सकता है।
गर्म-ऊनी वस्त्र पर्याप्त मात्रा में पहनना, अत्यधिक ठंड से बचने हेतु रात्रि को गर्म कंबल ओढ़ना, रजाई आदि का उपयोग करना, गर्म कमरे में सोना, अलाव तापना लाभदायक है।
अपथ्यः इस ऋतु में अत्यधिक ठंड सहना, ठंडा पानी, ठंडी हवा, भूख सहना, उपवास करना, रूक्ष, कड़वे, कसैले, ठंडे एवं बासी पदार्थों का सेवन, दिवस की निद्रा, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है।

आयुर्वेदा प्रचारक
सी एस चौधरी

Timeline Photos
08/08/2016

Timeline Photos

04/08/2016

🤗🤗🤗🍛🍛🍛🍛🤗🤗🤗🤗 *हाथ से खाना खाने की आदत है अच्छी*
मित्रों नमस्कार!आज मेरे दवाघर पर एक दक्षिण भारतीय दम्पत्ती,जो इस समय बुलँदशहर में रहते हैं अपने मंदबुद्धी बच्चे को दिखाने आयेl वो इतना सादा परिवार था कि अपना खाना तक साथ लेकर चले और दिखाकर वापिस चलते वक्त मुझसे अनुमति लेकर मेरे दवाघर पर ही बैठकर खाना खाने लगेl
उन्हे हाथ से खाना खाते देख मैने पूछा चम्मच दूँ तो वो एकदम से बोल बैठे *डा. साहब कभी हाथ से चावल खाकर देखे हैं,खाकर देखना दोगुना स्वाद आएगा*पर शायद वो इस बात से अन्भिग्य थे कि *हाथ से खाना खाने के वैग्यानिक फ़ायदे हैं*मैने यें फ़ायदे उनसे साँझा किये,आप से भी करता हूँ इस आशा के साथ कि दक्षिण भारतियों की तरह आप भी साफ़-सुथरे हाथों से खाना खाने की आदत डालेंगे और काँटे-चम्मच को स्टेटस सिम्बल नही बनायेंगे👇👇👇👇
🍛 *हाथों में है प्राण ऊर्जा*
आयुर्वेद के अनुसार हमारे हाथों में प्राण ऊर्जा होती है। जीवन के लिए आवश्यक सभी तत्व हमारे हाथों में पाए जाते है। इसलिए हमारे *हाथों का अंगूठा* अग्नि का प्रतीक है। *तर्जनी उंगली* हवा की प्रतीक है। *मध्यमा उंगली* आकाश की प्रतीक है। *अनामिका उंगली*पृथ्वी की प्रतीक है और *सबसे छोटी उंगली*जल की प्रतीक है। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।
जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम उंगलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और इससे जो हस्त मुद्रा बनती है। उसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता होती है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है।
🍛 *पाचन क्रिया में सुधार होता है*
टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है। जब हम हाथों से खाना खाते हैं तो हमारा दिमाग हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं। इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है, और पाचन तंत्र से खाना पचाने वाले रासायन स्त्रावित होने लगते हैं। जिससे पाचन क्रिया सुधरती है।
🍛 *तापमान का ख्याल रहता है*
आपके हाथ अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं। जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और आप इसे अपने शरीर की आवश्यकता के अनुसार तापमान पर ही ग्रहण करते हैं और यही शरीर के लिए फायदेमंद भी होता है
🍛 *एकाग्रता बढ़ाता है*
हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है। इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। इसलिए यह मशीन कि भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है।
🙏ईश्वर आपको स्वस्थ रखे
🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴
🙏🙏आपका ही- _ आयुर्वेदा प्रचारक
सी एस चौधरी
8750602121
🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴

Address

8750602121
New Delhi
110053

Telephone

08750602121

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurveda Promoter posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Nearby health & beauty businesses


Other Medical & Health in New Delhi

Show All