17/10/2026
दृष्टि बदलें, जीवन बदलें : माता की सवारियों से सीखें सुखी जीवन का रहस्य
नीरजा फाउंडेशन, शुभम कॉलोनी, कायड़, अजमेर
सचिव श्रीमती सीमा पाराशर के हृदय उद्गार
जय माता दी!
देवी माँ की विभिन्न सवारियाँ केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि उन्हें जीवन-मूल्यों से जोड़कर देखने पर आत्ममंथन की प्रेरणा भी देती हैं। प्रश्न यह नहीं कि माता किस वाहन पर विराजमान हैं, बल्कि यह है कि उन प्रतीकों से प्रेरित होकर हम अपने विचारों, स्वभाव और व्यवहार में क्या परिवर्तन लाते हैं।
सिंह हमें साहस, हंस विवेक, बाघ सजगता और कर्मठता, बैल परिश्रम एवं धैर्य, गरुड़ व्यापक दृष्टि, मोर सौंदर्य और सकारात्मकता, उल्लू विवेकपूर्ण जागरूकता, गधा श्रम एवं सहनशीलता और हाथी शक्ति के साथ धैर्य तथा विनम्रता का स्मरण करा सकता है। ये प्रतीकात्मक जीवन-शिक्षाएँ हैं; इनके अर्थ विभिन्न धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग भी हो सकते हैं।
अब विचार कीजिए, इन शिक्षाओं को जीवन में उतारने से क्या परिवर्तन आ सकता है? साहस हमें अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना सिखाता है, विवेक बिना सत्य जाने किसी पर आरोप लगाने से रोकता है, धैर्य पारिवारिक विवादों में संयम बनाए रखने में सहायता करता है और विनम्रता सफलता के बाद भी रिश्तों का सम्मान करना सिखाती है। सकारात्मक सोच कटुता के बीच भी प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देती है, जबकि श्रम और जिम्मेदारी हमें परिवार तथा समाज के विकास में योगदान देना सिखाते हैं।
वास्तविक परिवर्तन तब शुरू होता है, जब हम दूसरों को बदलने की अपेक्षा करने से पहले स्वयं के व्यवहार का आत्ममंथन करते हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे को समझें, माता-पिता बच्चों को संस्कारों के साथ समय दें, बच्चे बड़ों के अनुभवों का सम्मान करें, मित्र कठिन समय में साथ निभाएँ और पड़ोसी मतभेदों के बावजूद सद्भाव बनाए रखें। यही वे छोटे-छोटे प्रयास हैं, जो रिश्तों में विश्वास और जीवन में प्रसन्नता बढ़ाते हैं।
आज मनुष्य के पास सुख-सुविधाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन अनेक परिवारों में संवाद, धैर्य और आपसी समझ कम होती दिखाई देती है। इसका समाधान केवल दूसरों से अपेक्षा करने में नहीं, बल्कि अपनी सोच और व्यवहार को बेहतर बनाने में है। धार्मिक प्रतीकों के सामने शीश झुकाना श्रद्धा है, लेकिन उनसे प्रेरणा लेकर अपने आचरण को सुधारना आत्मपरिवर्तन है।
आइए, माता से केवल अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना न करें, बल्कि ऐसा विवेक भी माँगें कि हम दूसरों के कष्ट कम कर सकें। हमारी वाणी परिवार में प्रेम बढ़ाए, हमारा व्यवहार बच्चों को अच्छे संस्कार दे, हमारी मित्रता विश्वास जगाए और हमारा सामाजिक जीवन सहयोग एवं सद्भाव का उदाहरण बने।
याद रखें—दृष्टि बदलेगी तो विचार बदलेंगे, विचार बदलेंगे तो व्यवहार बदलेगा और व्यवहार बदलेगा तो जीवन की दिशा भी बदल सकती है। यही माता की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का सार्थक मार्ग है।
जय माता दी!
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नीरजा फाउंडेशन
शुभम कॉलोनी, कायड़, अजमेर
सचिव : श्रीमती सीमा पाराशर