30/04/2022
योग वाणी - आचार्य विपिन
जीवन में तनाव और मूर्खता का गहरा रिश्ता ...कौन फसा रह जाता हैं और बच निकलता हैं?
तनाव कोई ऐसी चीज़ नहीं हैं जो आकस्मिक आयी और उसने तुम्हे पकड़ लिया। जैसे बीमारी आकस्मिक नहीं आती हैं, उसी तरह तनाव भी आकस्मिक नहीं आता। इस दुनिया में कुछ भी आकस्मिक या अकाल नहीं हैं। सब नियम अनुसार होता हैं। और क्रिया का परिणाम के साथ गहरा रिश्ता हैं।
अगर किस्मत को दोष और उपाए देने से, या ग्रहो को दोष देनेसे जीवन बदल जाता तो दुनिया में दुःख या गरीबी तो होती ही नहीं।
क्या आप जानते हैं की किस्मत क्यों नहीं बदलती ?
क्यों की किस्मत होती ही नहीं हैं इसी लिए वो बदलती भी नहीं हैं। जो हैं वो ही बदल सकता हैं जो नहीं हैं वो नहीं बदल सकता। इसलिए किस्मत को दोष दो न दो, कोई फर्क नहीं आएगा।
मगर जो हैं आपके पास, जो बदला जा सकता हैं वो हैं आपका जीवन मगर वो क्यों नहीं बदलता क्योंकी जीवन अहंकार से पूरी तरह बंधा हुआ हैं इसलिए सत्ये सुन्ना तनाव ग्रसित लोगो के लिए बोहोत मुश्किल होता। सत्ये सुनते ही तनाव घ्रसित व्यक्ति, सत्ये के प्रति निरादर, हिंसक, उदासीन और भगोड़ा बन जाता हैं।
आप तनाव ग्रसित लोगो को देखो वो जीवन और दूसरो के प्रति कैसे होते हैं। चाहे वो धनवान हो या गरीब मुर्ख तो मूर्खता ही होती हैं इसलिए तनाव गरीब और अमीर नहीं देखता। वो आयु भी नहीं देखता, क्युकी तनाव का सीधा सम्बन्ध आपकी बुद्धि से और चरित्र से होता हैं।
जो व्यक्ति तनाव रहित हैं उसको देख कर बड़े बड़े उद्योग पतियों को भी जलन हो जाती हैं , क्युकी उसका जीवन उनसे बढ़िया हैं।
कोई व्यक्ति तनाव में हैं कभी उसकी बातें ध्यान से सुन्ना उसके इतिहास को सुन्ना, उसके जीवन का गहरा सम्बन्ध मूर्खताओं से निकलेगा। वो न कभी हालत को सुविकार करेगा, न गलती को सुविकार करेगा, न किसी समझदर के बताये हुई रस्ते पर चलेगा मगर फसने पर विलाप ज़रूर करेगा और भगवन को दोष देता रहेगा।
तनाव पूर्ण व्यक्ति डर से भरा हुआ मिलेगा, और ज्ञान से किताबो से, आत्म जागरूकता से उसका कभी लेना देना नहीं हुआ होगा। ज्योतिष उपायों में, तंत्र मन्त्र में, पैसा कमाने की शार्ट कट तकनीक में, शराब के अड्डों पर, नेता गिरी में, सरकारी दफ्तरों मे, स्कूली शिक्षकों मे, हस्तपतालों में, ऐसे लोग अधिक मिलेंगे। और ऐसी जगहों की कमाई भी तनाव में रहने वालो के कारण हैं, "तनाव" अपने आप में अरबो का व्यापार हैं। आप तनाव में आओगे तो यहाँ जाओगे न।
तनाव में रहने वाला व्यक्ति अपने पुरे घर को पागल कर देता हैं। और तनाव क्यूना हो, उसका जीवन और उसकी सोच ऐसी होती हैं जैसे दिमग। कई लोग तो तनाव पूर्ण दिखना भी चाहते हैं क्युकी उन्हें लगता हैं बड़े लोग के तरह दिखने के लिए तनाव में रहना ज़रूरी हैं। अब ये तनाव का मूर्खतापूर्ण विचार हर बच्चे के जीवन में घर बना रहा हैं, बच्चे आत्म हत्या करना कहते हैं किसने उन्हें ये रास्ता दिखाया ? उनके मुर्ख शिक्षकों और माँ बाप ने और किसने।
माँ बाप आत्महत्या करना चाहते हैं क्युकी वो जो पाना चाहते हे वो मिल नहीं रहा वैसे बच्चे आत्महत्या करना चाहते हैं क्युकी जो चाहिए उन्हें मिल नहीं रहा। जीवन को बचपन से ही ज़्यादा से ज़्यादा प्राप्त करने की सोच, बच्चो को किसने दी मुर्ख माँ बाप ने।
जो काम सरलता से हो सकता हैं , चाहे कठिन ही क्यों न हो उसको तनाव से करना की कला किसने दी ?
क्या शिक्षा तनाव रहित नहीं ली जा सकती ?
क्या व्यापार तनाव रहित नहीं किया जा सकता ?
क्या नौकरी तनाव रहित नहीं की जा सकती ?
बिलकुल की जा सकती हैं। और अगर किसी का उत्तर "नहीं" हैं तो वो मुर्ख हैं याने उसने खूब उपद्रव अपने और दूसरो के जीवन में दाल रखे हैं। आप जीवन को जनम और मृत्यु के बीच जीवन के चयन के सत्यता को समझ लोगे तो सुविकर्ता आजायेगी।
अकेले कैसे कहेंगे, कल क्या होगा, मैं कैसे कर पाउँगा , मेरे बच्चो का क्या होगा, मुझे नौकरी मिलेगी या नहीं, किसी बीवी हैं, केसा पति हैं, कैसे बच्चे हैं, कैसे भाई बेहेन हैं ....इस दलदल ही तनाव मुक्ति ढूंढ रहे हो तो न आज तक किसी को मिली हैं न कभी मिलेगी। घर मैं एक व्यक्ति भी तनाव वाला अगर आ जाये, याने की मुर्ख याने की उपद्द्रवि आजाये तो घर नहीं आस पड़ोस सब को लपेट लेता हैं।
ऐसा इसलिए भी हैं क्योकि आपको सिखाया जाता हैं की बेटा हर मत मानो, भौतिक सुख प्राप्त करके ही रहो।
इसलिए सब पाखंड आपके आस पास ही हैं।
एक बार हार मान कर देखो। हर किस्से माननी हैं ? अपने रवैये से, अपने दृष्टि कौन से। जैसे ही आपका अहंकार और मूर्खता हर मान जाएगी तो धीरे धीरे ध्यान और ज्ञान के फूल खिलेंगे।
आपके घर से लेकर, दुनिया भर के देशो में किस बात से तनाव हैं और तनाव का मूल कारण एक ही हैं "मूर्खता ।
मैं कहता हूँ, ऊब जाओ अपनी मूर्खता से , तनाव से। ऐसा नहीं की ज़िन्दगी झंड हो जाएगी, तनाव वाले व्यक्ति की ज़िन्दगी पहले से ही झंड ही हैं।
मैं आपको बस बता रहा हूँ की अपने अपने बच्चो की क्या हालत कर दी हैं, खुद की क्या हालत करदी हैं, इस हालत को कब तक पाखंड और नोच खसोट तकनीक से बनाये रखो गे।
जितने निर्धन और अमीर लोग हैं उनका जीवन के दो आधार बिलकुल एक से हैं। एक ख़ास प्रकार की मूर्खता को प्राप्त हो चूका हैं और एक ख़ास प्रकार की मूर्खता सीखना चाहता हैं। दो ही अपनी ज़िन्दगी ख़ास तनाव मैं जी रहे हैं।
क्या येही काम येही जीवन तनाव रहित जी सकते हैं ?
आप जीवन को, तनाव रहित जी सकते हैं ... कमज़ोर आप हो नहीं आपको केवल बताया गया हैं कमज़ोर मत रह जाना। दरसल कमज़ोर जैसा भी कोई नहीं , ये कमज़ोर ही आगे जा के बलवान बनते हैं और जो तनाव लेता हैं वो पागल तो बन सकता हैं मगर बलवान नहीं।
बलवान वो नहीं जो किसी की हत्या कर सकता हो। बलवान तो वो हैं जिसको मारा जाये पर मरे नहीं। जिसको गिराया जाये और फिर उठ खड़ा हो। जिसे तड़पाया जाये मगर उसका आनंद समाप्त नहो। जो जीवन की मुल्ये हीनता से ऊबचुका हो। जो जीवन अकेले जिए या भीड़ में , दोनों को सामान समझे।