27/09/2026
नमस्कार, आज 27 सितम्बर 2026, आश्विन माह, कृष्ण पक्ष, रविवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।
नक्षत्र उत्तर भाद्रपद सुबह 11:08 बजे तक, तत्पश्चात रेवती। तिथि प्रतिपदा रात्रि 08:58 बजे तक, तत्पश्चात द्वितीया। योग वृद्धि सुबह 11:17 बजे तक, तत्पश्चात ध्रुव। करण बालव सुबह 09:41 बजे तक, तत्पश्चात कौलव रात्रि 08:58 बजे तक, तत्पश्चात तैतिल।
आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास का 5वाँ दिन है, जो स्वाध्याय, आत्मनिरीक्षण, संयमित आचरण और पितृ व देव आराधना के लिए विशेष पुण्यदायी समय है। पितृपक्ष प्रारम्भ और आश्विन मास आरम्भ, उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार आज से पावन आश्विन मास और सोलह दिवसीय महालय पितृपक्ष का विधिवत आरम्भ हो रहा है। यह काल पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का महापर्व है। प्रतिपदा श्राद्ध, जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी माह की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो अथवा नाना नानी के श्राद्ध के लिए प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध अत्यंत उत्तम माना गया है।इष्टि, यह वैदिक श्रौत परंपरा का अनुष्ठान है, जो कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर देवताओं और पितरों की प्रसन्नता के लिए संपन्न किया जाता है। पञ्चक आज पूरे दिन रहेगा। पञ्चक में दक्षिण दिशा की यात्रा और छत ढलाई जैसे कार्यों में पारंपरिक नियमों का पालन करना चाहिए। गण्ड मूल सुबह 11:08 बजे से रेवती नक्षत्र के प्रभाव से आरम्भ होगा, जिसमें जन्मे जातकों की मूल शांति कराना शास्त्रसम्मत माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:12 बजे से 11:08 बजे तक रहेगा, जो कार्यों में सफलता और सिद्धि प्रदान करने वाला शुभ योग है।
आडल योग और विडाल योग ज्योतिष में प्रतिकूल योग माने जाते हैं, इसलिए इन समयों में नवीन व संवेदनशील कार्यों को आरंभ करने से बचना चाहिए।
शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:48 ए एम से 12:37 पी एम। विजय मुहूर्त 02:12 पी एम से 03:00 पी एम। अमृत काल सुबह 06:24 ए एम से 07:59 ए एम। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:12 ए एम से 11:08 ए एम तक।
अशुभ समय
राहुकाल शाम 04:42 पी एम से 06:12 पी एम। आडल योग सुबह 06:12 ए एम से 11:08 ए एम तक। विडाल योग सुबह 11:08 ए एम से दोपहर 01:25 पी एम तक। गण्ड मूल सुबह 11:08 ए एम से सुबह 06:12 ए एम 28 सितम्बर तक। पञ्चक पूरे दिन।
दिशा शूल आज पश्चिम दिशा में है
रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना वर्जित माना जाता है। यदि आज पश्चिम दिशा की यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा गुड़ या पान खाकर निकलें, और पश्चिम दिशा के दिक्पाल वरुण देव का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
पश्चिमे वरुणो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से पश्चिम दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।
आज का विशेष उपाय
आज रविवार, पितृपक्ष आरम्भ और प्रतिपदा श्राद्ध का अत्यंत पावन दिन है। भगवान सूर्य देव की कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा गुड़, रोली, अक्षत और थोड़े काले तिल मिला लें। ॐ सूर्याय नमः और ॐ पितृभ्यो नमः बोलते हुए यह जल सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक लोटे जल में काले तिल और थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करें। दोपहर के समय पितरों के निमित्त घर में बनी पहली ताजी रोटी पर थोड़ा सा गुड़ और घी रखकर गाय या कौवे को आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से पितृ दोष शांत होता है, मान सम्मान में वृद्धि होती है और घर में सुख शांति व वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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हर हर महादेव-
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