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नमस्कार, आज 27 सितम्बर 2026, आश्विन माह, कृष्ण पक्ष, रविवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र उत्तर भाद्रपद सुबह 11:08 ...
27/09/2026

नमस्कार, आज 27 सितम्बर 2026, आश्विन माह, कृष्ण पक्ष, रविवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।
नक्षत्र उत्तर भाद्रपद सुबह 11:08 बजे तक, तत्पश्चात रेवती। तिथि प्रतिपदा रात्रि 08:58 बजे तक, तत्पश्चात द्वितीया। योग वृद्धि सुबह 11:17 बजे तक, तत्पश्चात ध्रुव। करण बालव सुबह 09:41 बजे तक, तत्पश्चात कौलव रात्रि 08:58 बजे तक, तत्पश्चात तैतिल।

आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास का 5वाँ दिन है, जो स्वाध्याय, आत्मनिरीक्षण, संयमित आचरण और पितृ व देव आराधना के लिए विशेष पुण्यदायी समय है। पितृपक्ष प्रारम्भ और आश्विन मास आरम्भ, उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार आज से पावन आश्विन मास और सोलह दिवसीय महालय पितृपक्ष का विधिवत आरम्भ हो रहा है। यह काल पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का महापर्व है। प्रतिपदा श्राद्ध, जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी माह की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो अथवा नाना नानी के श्राद्ध के लिए प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध अत्यंत उत्तम माना गया है।इष्टि, यह वैदिक श्रौत परंपरा का अनुष्ठान है, जो कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर देवताओं और पितरों की प्रसन्नता के लिए संपन्न किया जाता है। पञ्चक आज पूरे दिन रहेगा। पञ्चक में दक्षिण दिशा की यात्रा और छत ढलाई जैसे कार्यों में पारंपरिक नियमों का पालन करना चाहिए। गण्ड मूल सुबह 11:08 बजे से रेवती नक्षत्र के प्रभाव से आरम्भ होगा, जिसमें जन्मे जातकों की मूल शांति कराना शास्त्रसम्मत माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:12 बजे से 11:08 बजे तक रहेगा, जो कार्यों में सफलता और सिद्धि प्रदान करने वाला शुभ योग है।
आडल योग और विडाल योग ज्योतिष में प्रतिकूल योग माने जाते हैं, इसलिए इन समयों में नवीन व संवेदनशील कार्यों को आरंभ करने से बचना चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:48 ए एम से 12:37 पी एम। विजय मुहूर्त 02:12 पी एम से 03:00 पी एम। अमृत काल सुबह 06:24 ए एम से 07:59 ए एम। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:12 ए एम से 11:08 ए एम तक।

अशुभ समय
राहुकाल शाम 04:42 पी एम से 06:12 पी एम। आडल योग सुबह 06:12 ए एम से 11:08 ए एम तक। विडाल योग सुबह 11:08 ए एम से दोपहर 01:25 पी एम तक। गण्ड मूल सुबह 11:08 ए एम से सुबह 06:12 ए एम 28 सितम्बर तक। पञ्चक पूरे दिन।

दिशा शूल आज पश्चिम दिशा में है
रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना वर्जित माना जाता है। यदि आज पश्चिम दिशा की यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा गुड़ या पान खाकर निकलें, और पश्चिम दिशा के दिक्पाल वरुण देव का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
पश्चिमे वरुणो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से पश्चिम दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय
आज रविवार, पितृपक्ष आरम्भ और प्रतिपदा श्राद्ध का अत्यंत पावन दिन है। भगवान सूर्य देव की कृपा और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा गुड़, रोली, अक्षत और थोड़े काले तिल मिला लें। ॐ सूर्याय नमः और ॐ पितृभ्यो नमः बोलते हुए यह जल सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक लोटे जल में काले तिल और थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करें। दोपहर के समय पितरों के निमित्त घर में बनी पहली ताजी रोटी पर थोड़ा सा गुड़ और घी रखकर गाय या कौवे को आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से पितृ दोष शांत होता है, मान सम्मान में वृद्धि होती है और घर में सुख शांति व वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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जिस किसी व्यक्ति को अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना हो, कुंडली अनुसार वैदिक उपाय, मंत्र उपचार, सिद्ध रत्न और उपरत्न जैसे पुखराज, नीलम, ओपल, माणिक, मोती, पन्ना, गोमेद, लहसुनिया इत्यादि उचित रेट पर उपलब्ध हैं, सिद्ध रुद्राक्ष, सिद्ध यंत्र, व्यापार वृद्धि यंत्र, शुक्र मणि, घर की सुख शांति के लिए यंत्र, या अन्य किसी व्यक्तिगत समस्या का समाधान मंत्र हीलिंग के द्वारा करवाने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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नमस्कार, आज 26 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, शनिवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र पूर्व भाद्रपद सुबह 11:32...
26/09/2026

नमस्कार, आज 26 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, शनिवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र पूर्व भाद्रपद सुबह 11:32 बजे तक, तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद। तिथि पूर्णिमा रात्रि 10:18 बजे तक, तत्पश्चात प्रतिपदा। योग गण्ड दोपहर 01:17 बजे तक, तत्पश्चात वृद्धि। करण विष्टि सुबह 10:46 बजे तक, तत्पश्चात बव रात्रि 10:18 बजे तक, तत्पश्चात बालव।

आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास का 4वाँ दिन है, जो संयम, स्वाध्याय, आत्मनिरीक्षण और भगवान श्रीहरि की भक्ति के लिए अत्यंत पुण्य फलदायी समय है। भाद्रपद पूर्णिमा और पूर्णिमा व्रत, आज भाद्रपद मास की पावन पूर्णिमा तिथि है। इस दिन भगवान सत्यनारायण का पूजन, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से मनोवांछित फल और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा श्राद्ध, आज से पितृ पक्ष के श्राद्ध कर्म का आरम्भ हो रहा है। जिन पूर्वजों का देहावसान पूर्णिमा तिथि पर हुआ हो, उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आज श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
अन्वाधान, यह वैदिक यज्ञ परंपरा से जुड़ा विशेष दिन है, जिसमें आगामी इष्टि यज्ञ के संकल्प और हविष्य की तैयारी की जाती है। पञ्चक आज पूरे दिन रहेगा। पञ्चक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा और छत ढलवाने जैसे निर्माण कार्यों में शास्त्रों के नियमों का पालन किया जाता है।
भद्रा सुबह 06:11 बजे से 10:46 बजे तक रहेगी। इस समय में शुभ और नवीन कार्यों की शुरुआत टालनी चाहिए।आडल योग सुबह 11:32 बजे से अगले दिन सुबह 06:12 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में इसे प्रतिकूल योग माना गया है, इसलिए संवेदनशील कार्यों को सोच समझकर करना चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:48 ए एम से 12:37 पी एम। विजय मुहूर्त 02:13 पी एम से 03:01 पी एम।

अशुभ समय
राहुकाल सुबह 09:12 ए एम से 10:42 ए एम। भद्रा सुबह 06:11 ए एम से 10:46 ए एम। आडल योग सुबह 11:32 ए एम से सुबह 06:12 ए एम 27 सितम्बर तक। पञ्चक पूरे दिन।

दिशा शूल आज पूर्व दिशा में है
शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करना वर्जित माना जाता है। यदि आज पूर्व दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा अदरक या काली उड़द का दाना खाकर निकलें, और पूर्व दिशा के दिक्पाल देवराज इंद्र का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
प्राच्यां पुरन्दरो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पूर्व दिशा के स्वामी देवराज इंद्र यानी पुरंदर हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से पूर्व दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय

आज शनिवार, भाद्रपद पूर्णिमा और पितृ पक्ष आरम्भ का अत्यंत पावन संयोग है। शनि देव, भगवान सत्यनारायण और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात एक तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, थोड़े काले तिल और अक्षत मिला लें। यह जल पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का स्मरण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान सत्यनारायण के सम्मुख घी का दीपक जलाकर थोड़ा सा पंचामृत या मिश्री का भोग लगाएँ। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक दीपक पश्चिम दिशा की ओर मुख करके प्रज्वलित करें और घर में बनी पहली रोटी पर थोड़ा सा सरसों का तेल व गुड़ लगाकर किसी काले कुत्ते या कौवे को खिलाएँ। इस उपाय से पितृ दोष, शनि दोष और मानसिक कष्ट दूर होते हैं तथा घर में सुख शांति व समृद्धि का वास होता है।

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25/09/2026
नमस्कार, आज 25 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, शुक्रवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र शतभिषा सुबह 11:22 बजे ...
24/09/2026

नमस्कार, आज 25 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, शुक्रवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र शतभिषा सुबह 11:22 बजे तक, तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद। तिथि चतुर्दशी रात्रि 11:06 बजे तक, तत्पश्चात पूर्णिमा। योग शूल दोपहर 02:51 बजे तक, तत्पश्चात गण्ड। करण गर सुबह 11:17 बजे तक, तत्पश्चात वणिज रात्रि 11:06 बजे तक, तत्पश्चात विष्टि।

आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास का तीसरा दिन है, जो आत्मशुद्धि, भक्ति, जप और सात्विक साधना के लिए अत्यंत पावन समय माना गया है।गणेश विसर्जन, आज दस दिवसीय पावन गणेशोत्सव की पूर्णता का दिवस है। भगवान श्री गणेश जी को भावभीनी विदाई देकर उनसे समस्त विघ्नों को हरने और अगले वर्ष पुनः पधारने की मंगल प्रार्थना की जाती है। अनन्त चतुर्दशी, भगवान श्रीहरि विष्णु के अनन्त स्वरूप की पूजा का महापर्व है। इस दिन चौदह गांठों वाला अनन्त सूत्र धारण करने से जीवन के सभी संकटों से रक्षा होती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
पञ्चक आज पूरे दिन रहेगा। पञ्चक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा और विशेष निर्माण कार्यों में शास्त्रों के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। भद्रा रात्रि 11:06 बजे से अगले दिन सुबह 06:11 बजे तक रहेगी। इस अवधि में नवीन मांगलिक कार्यों की शुरुआत टालनी चाहिए।
रवि योग सुबह 06:11 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा, जो सूर्य देव के प्रभाव से कार्यों में तेज और शुभता प्रदान करता है। आडल योग ज्योतिष में अशुभ योग माना गया है, इसलिए सुबह 11:22 बजे तक नए और महत्वपूर्ण कार्यों के आरम्भ से बचना चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:48 ए एम से 12:37 पी एम। विजय मुहूर्त 02:13 पी एम से 03:01 पी एम। अमृत काल रात्रि 03:28 ए एम 26 सितम्बर से सुबह 05:05 ए एम 26 सितम्बर तक। रवि योग सुबह 06:11 ए एम से 11:22 ए एम तक।

अशुभ समय
राहुकाल सुबह 10:42 ए एम से दोपहर 12:13 पी एम। आडल योग सुबह 06:11 ए एम से 11:22 ए एम तक। भद्रा रात्रि 11:06 पी एम से सुबह 06:11 ए एम 26 सितम्बर तक। पञ्चक पूरे दिन।

दिशा शूल आज पश्चिम दिशा में है
शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि आज पश्चिम दिशा की यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा जौ, राई या दही खाकर निकलें, और पश्चिम दिशा के दिक्पाल वरुण देव का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
पश्चिमे वरुणो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें नमन करने से पश्चिम दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय

आज शुक्रवार, अनन्त चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का अत्यंत पावन संयोग है। भगवान श्रीहरि विष्णु, विघ्नहर्ता गणेश और माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात एक सूती कच्चे धागे को हल्दी में रंगकर उसमें चौदह गांठें लगा लें। इसे भगवान विष्णु और भगवान गणेश के चरणों में अर्पित कर ॐ अनन्ताय नमः और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें, फिर इसे अपनी दाहिनी कलाई पर धारण करें। इसके बाद माँ लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएँ और सफेद मिष्ठान या खीर का भोग लगाएँ। गणेश विसर्जन के समय बप्पा को दुर्वा और मोदक या गुड़ का भोग लगाकर घर की सुख शांति की प्रार्थना करें। साथ ही गाय को थोड़ा सा गुड़ और ताजी रोटी खिलाएँ। इस उपाय से जीवन की सभी अड़चनें समाप्त होती हैं और घर में अखंड सुख, सौभाग्य और समृद्धि का वास होता है।

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आजकापंचांग दैनिकपंचांग वैदिकज्योतिष अनन्तचतुर्दशी गणेशविसर्जन शुक्रवारउपाय चातुर्मास एस्ट्रोशाश्वतशर्मा कुंडलीविश्लेषण वैदिकउपाय पञ्चक Panchang DailyPanchang VedicAstrology AnantChaturdashi GaneshVisarjan AstroShashwatSharma FridayRemedies Horoscope VedicRemedies AstrologyRemedies Panchak LakshmiPuja

नमस्कार, आज 24 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, बृहस्पतिवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र धनिष्ठा सुबह 10:35 ...
23/09/2026

नमस्कार, आज 24 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, बृहस्पतिवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र धनिष्ठा सुबह 10:35 बजे तक, तत्पश्चात शतभिषा। तिथि त्रयोदशी रात्रि 11:18 बजे तक, तत्पश्चात चतुर्दशी। योग धृति दोपहर 03:55 बजे तक, तत्पश्चात शूल। करण कौलव सुबह 11:09 बजे तक, तत्पश्चात तैतिल रात्रि 11:18 बजे तक, तत्पश्चात गर।

आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास का दूसरा दिन है, जो आत्मचिंतन, जप, तप और सात्विक जीवन शैली के अभ्यास के लिए अत्यंत पुण्यदायी समय है। गुरु प्रदोष व्रत, बृहस्पतिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस पावन दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से ज्ञान, वैवाहिक सुख, उत्तम स्वास्थ्य और समस्त संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। पञ्चक आज पूरे दिन रहेगा। पञ्चक काल में दक्षिण दिशा की यात्रा, घर की छत ढलवाना, चारपाई बुनना और तृण संचय जैसे कार्यों में विशेष वैदिक नियमों का पालन किया जाता है। रवि योग सुबह 10:35 बजे से अगले दिन सुबह 06:11 बजे तक रहेगा। यह योग सूर्य देव के प्रभाव से समस्त नकारात्मक प्रभावों को शांत कर जीवन में तेज और सफलता प्रदान करता है। आडल योग और विडाल योग ज्योतिष शास्त्र में प्रतिकूल योग माने जाते हैं, इसलिए इस समय में नवीन और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत टालनी चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:49 ए एम से 12:37 पी एम। विजय मुहूर्त 02:14 पी एम से 03:02 पी एम। अमृत काल रात्रि 03:56 ए एम 25 सितम्बर से सुबह 05:35 ए एम 25 सितम्बर तक। रवि योग सुबह 10:35 ए एम से सुबह 06:11 ए एम 25 सितम्बर तक।

अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 01:44 पी एम से 03:14 पी एम। विडाल योग सुबह 06:10 ए एम से 10:35 ए एम। आडल योग सुबह 10:35 ए एम से सुबह 06:11 ए एम 25 सितम्बर तक। पञ्चक पूरे दिन।

दिशा शूल आज दक्षिण दिशा में है
बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा में यात्रा करना वर्जित माना जाता है। यदि आज दक्षिण दिशा की यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा दही या पीली सरसों खाकर निकलें, और दक्षिण दिशा के दिक्पाल यमराज का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
दक्षिणे यमराजो वै दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि दक्षिण दिशा के अधिपति धर्मराज यम हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें नमन करने से दक्षिण दिशा के दिशा शूल का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय

आज बृहस्पतिवार और गुरु प्रदोष व्रत का अत्यंत दिव्य संयोग है। भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने तथा जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। शाम के समय प्रदोष काल में स्नान या हाथ पैर धोकर एक लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, एक चुटकी पिसी हल्दी और साबुत अक्षत यानी चावल मिला लें। इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय तथा ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करें। इसके बाद शिवलिंग के समीप और घर के मंदिर में गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। साथ ही घर में बनी पहली रोटी पर थोड़ा सा गुड़ और घी लगाकर किसी गाय को आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से गुरु ग्रह मजबूत होता है, ज्ञान व सौभाग्य में वृद्धि होती है और शिव कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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नमस्कार, आज 23 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, बुधवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र श्रवण सुबह 09:09 बजे तक,...
22/09/2026

नमस्कार, आज 23 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, बुधवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र श्रवण सुबह 09:09 बजे तक, तत्पश्चात धनिष्ठा। तिथि द्वादशी रात्रि 10:50 बजे तक, तत्पश्चात त्रयोदशी। योग सुकर्मा शाम 04:27 बजे तक, तत्पश्चात धृति। करण बव सुबह 10:21 बजे तक, तत्पश्चात बालव रात्रि 10:50 बजे तक, तत्पश्चात कौलव।

आज के विशेष पर्व और योग
तृतीय चातुर्मास प्रारम्भ, आज से चातुर्मास के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है, जो साधना, संयम, स्वाध्याय और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पुण्य फलदायी समय है। परिवर्तिनी एकादशी पारण, एकादशी व्रत का विधिपूर्वक पारण आज द्वादशी तिथि के शुभ समय में किया जाता है, जिससे एकादशी व्रत का संपूर्ण पुण्य फल प्राप्त होता है। वामन जयन्ती, भगवान श्रीहरि विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन देव का पावन प्राकट्य दिवस है। इस दिन वामन भगवान का पूजन करने से अहंकार दूर होता है, बुद्धि व सामर्थ्य बढ़ता है और समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। भुवनेश्वरी जयन्ती, दस महाविद्याओं में चतुर्थ महाविद्या माँ भुवनेश्वरी का प्राकट्य दिवस है। माँ भुवनेश्वरी की उपासना से साधक को समस्त सांसारिक सुख, सौंदर्य, तेज और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। शरद्कालीन सम्पात, खगोलीय दृष्टि से यह वह समय है जब दिन और रात बराबर होते हैं और सूर्य विषुव रेखा को पार करता है, जो शरद ऋतु के आगमन का सूचक है। पञ्चक, रात्रि 09:57 बजे से पञ्चक आरम्भ हो रहा है। पञ्चक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा, छत ढलवाना, लकड़ी संचय और दाह संस्कार जैसे कार्यों में विशेष वैदिक नियमों का पालन किया जाता है।विडाल योग, ज्योतिष शास्त्र में विडाल योग को प्रतिकूल योग माना जाता है, इसलिए इस अवधि में किसी भी नए व संवेदनशील कार्य की शुरुआत टालनी चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त आज कोई नहीं है। विजय मुहूर्त 02:15 पी एम से 03:04 पी एम। अमृत काल रात्रि 09:52 पी एम से 11:36 पी एम।

अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 12:13 पी एम से 01:44 पी एम। विडाल योग सुबह 09:09 ए एम से सुबह 06:10 ए एम 24 सितम्बर तक। पञ्चक रात्रि 09:57 पी एम से सुबह 06:10 ए एम 24 सितम्बर तक।

दिशा शूल आज उत्तर दिशा में है
बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि आज उत्तर दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा साबुत धनिया या तिल खाकर निकलें, और उत्तर दिशा के दिक्पाल कुबेर देव का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
उत्तरे धनदो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि उत्तर दिशा के अधिपति धन के स्वामी कुबेर देव हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से उत्तर दिशा के दिशा शूल का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा सुरक्षित, निर्विघ्न और सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय

आज बुधवार, वामन जयन्ती और माँ भुवनेश्वरी जयन्ती का अत्यंत पावन और दुर्लभ संयोग है। बुध ग्रह की शुभता, व्यापार में उन्नति, बुद्धि विकास और माँ भुवनेश्वरी की कृपा प्राप्त करने के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात पूजा स्थान में भगवान गणेश जी को दुर्वा यानी दूब घास और थोड़ा सा गुड़ अर्पित करें। इसके बाद भगवान वामन देव का ध्यान करते हुए एक लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा सा कच्चा दूध और एक चुटकी हल्दी मिलाकर तुलसी के पौधे की जड़ में चढ़ाएँ। इसके बाद माँ भुवनेश्वरी के ध्यान के साथ ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः मंत्र का 21 या 108 बार जाप करें। साथ ही थोड़ी सी हरी मूंग दाल या हरा चारा किसी गाय को आदरपूर्वक खिलाएँ। सायंकाल के समय घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। इस उपाय से व्यापार की रुकावटें दूर होती हैं, वाणी में प्रभाव आता है और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

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नमस्कार, आज 22 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, मंगलवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र उत्तराषाढा सुबह 07:06 ब...
21/09/2026

नमस्कार, आज 22 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, मंगलवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र उत्तराषाढा सुबह 07:06 बजे तक, तत्पश्चात श्रवण। तिथि एकादशी रात्रि 09:43 बजे तक, तत्पश्चात द्वादशी। योग अतिगण्ड शाम 04:29 बजे तक, तत्पश्चात सुकर्मा। करण वणिज सुबह 08:55 बजे तक, तत्पश्चात विष्टि रात्रि 09:43 बजे तक, तत्पश्चात बव।

आज के विशेष पर्व और योग
द्वितीय चातुर्मास का अन्तिम दिन है, जो संयम, नियम, स्वाध्याय और श्रीहरि की पावन उपासना की पूर्णता का अत्यंत पुण्यदायी समय है।परिवर्तिनी एकादशी, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान श्रीहरि विष्णु करवट बदलते हैं। इस दिन व्रत, पूजन और दान करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और समस्त पापों का नाश होता है।कल्कि द्वादशी, भगवान श्रीहरि के दसवें और भावी अवतार भगवान कल्कि के स्मरण व पूजन का दिन है, जो अधर्म के निवारण और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।भद्रा, सुबह 08:55 बजे से रात्रि 09:43 बजे तक भद्रा काल रहेगा। इस समय में नवीन मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत टालनी चाहिए। रवि योग, सूर्य देव की सकारात्मक ऊर्जा से युक्त यह शुभ योग सुबह 06:09 बजे से 07:06 बजे तक रहेगा, जो कार्यों में तेज और सफलता प्रदान करता है।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:49 ए एम से 12:38 पी एम। विजय मुहूर्त 02:15 पी एम से 03:04 पी एम। अमृत काल रात्रि 09:52 पी एम से 11:36 पी एम। रवि योग सुबह 06:09 ए एम से 07:06 ए एम तक।

अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 03:16 पी एम से शाम 04:47 पी एम। भद्रा सुबह 08:55 ए एम से रात्रि 09:43 पी एम तक।

दिशा शूल आज उत्तर दिशा में है
मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि आज उत्तर दिशा की यात्रा करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व थोड़ा सा गुड़ या धनिया खाकर निकलें, और उत्तर दिशा के दिक्पाल कुबेर देव का स्मरण करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
उत्तरे धनदो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि उत्तर दिशा के स्वामी धन के अधिपति कुबेर देव हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से उत्तर दिशा के दिशा शूल का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा निर्विघ्न, सुरक्षित व सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय
आज मंगलवार और परिवर्तिनी एकादशी का अत्यंत पावन संयोग है। भगवान श्रीहरि विष्णु और श्री हनुमान जी की कृपा से कर्ज मुक्ति, आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख शांति के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात एक तांबे के लोटे में जल, थोड़ी सी पिसी हल्दी, थोड़ा सा गुड़ और तुलसी दल मिला लें। यह जल ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बोलते हुए भगवान विष्णु को अर्पित करें या तुलसी के पौधे की जड़ में चढ़ाएँ। इसके बाद हनुमान जी के सम्मुख घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। सायंकाल के समय घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और किसी गाय को थोड़ा सा गुड़ व ताजी रोटी आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से मंगल और गुरु ग्रह की शुभता प्राप्त होती है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।

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नमस्कार, आज 21 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, सोमवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।
21/09/2026

नमस्कार, आज 21 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, सोमवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नमस्कार, आज 21 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, सोमवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र उत्तराषाढा पूर्ण रात्रि तक रहेगा। तिथि दशमी रात्रि 08:00 बजे तक, तत्पश्चात एकादशी। योग शोभन शाम 04:06 बजे तक, तत्पश्चात अतिगण्ड। करण तैतिल सुबह 06:58 बजे तक, तत्पश्चात गर रात्रि 08:00 बजे तक, तत्पश्चात वणिज।

आज के विशेष पर्व और योग
द्वितीय चातुर्मास का 29वाँ दिन है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु के ध्यान, जप, तप और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पुण्यदायी समय माना गया है। दशावतार व्रत, यह पावन व्रत भगवान विष्णु के दस दिव्य अवतारों के स्मरण और पूजन का दिन है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी संकट कटते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।रवि योग आज पूरे दिन रहेगा। भगवान सूर्य देव के प्रभाव से यह योग सभी दोषों को दूर कर मान सम्मान, तेज और कार्य सिद्धि प्रदान करता है। विडाल योग, ज्योतिष शास्त्र में विडाल योग को प्रतिकूल और अशुभ योग माना गया है, इसलिए इस अवधि में किसी भी नए और संवेदनशील कार्य को शुरू करने से बचना चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:50 ए एम से 12:39 पी एम। विजय मुहूर्त 02:16 पी एम से 03:05 पी एम। अमृत काल रात्रि 12:02 ए एम 22 सितम्बर से 01:48 ए एम 22 सितम्बर तक। रवि योग पूरे दिन।

अशुभ समय
राहुकाल सुबह 07:40 ए एम से 09:11 ए एम। विडाल योग सुबह 06:09 ए एम से रात्रि 12:31 ए एम 22 सितम्बर तक।

दिशा शूल आज पूर्व दिशा में है
सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि आज पूर्व दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व शीशे में अपना चेहरा देखकर निकलें, थोड़ा सा कच्चा दूध या घी खाकर निकलें, और पूर्व दिशा के दिक्पाल देवराज इंद्र का ध्यान करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
प्राच्यां पुरन्दरो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पूर्व दिशा के स्वामी देवराज इंद्र यानी पुरंदर हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से पूर्व दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा सुरक्षित, निर्विघ्न और सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय
आज सोमवार, दशावतार व्रत और पूरे दिन रवि योग का शुभ संयोग है। भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की कृपा से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और अक्षत यानी साबुत चावल मिला लें। इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाकर दशावतार का स्मरण करें। साथ ही घर में बनी पहली रोटी पर थोड़ा सा सफेद मक्खन या मिश्री लगाकर किसी गाय को आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से चंद्र दोष शांत होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख शांति का वास होता है।

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नमस्कार, आज 21 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, सोमवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।नक्षत्र उत्तराषाढा पूर्ण रात्रि ...
21/09/2026

नमस्कार, आज 21 सितम्बर 2026, भाद्रपद माह, शुक्ल पक्ष, सोमवार, विक्रम संवत 2082 कालयुक्त।

नक्षत्र उत्तराषाढा पूर्ण रात्रि तक रहेगा। तिथि दशमी रात्रि 08:00 बजे तक, तत्पश्चात एकादशी। योग शोभन शाम 04:06 बजे तक, तत्पश्चात अतिगण्ड। करण तैतिल सुबह 06:58 बजे तक, तत्पश्चात गर रात्रि 08:00 बजे तक, तत्पश्चात वणिज।

आज के विशेष पर्व और योग
द्वितीय चातुर्मास का 29वाँ दिन है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु के ध्यान, जप, तप और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पुण्यदायी समय माना गया है। दशावतार व्रत, यह पावन व्रत भगवान विष्णु के दस दिव्य अवतारों के स्मरण और पूजन का दिन है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी संकट कटते हैं और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।रवि योग आज पूरे दिन रहेगा। भगवान सूर्य देव के प्रभाव से यह योग सभी दोषों को दूर कर मान सम्मान, तेज और कार्य सिद्धि प्रदान करता है। विडाल योग, ज्योतिष शास्त्र में विडाल योग को प्रतिकूल और अशुभ योग माना गया है, इसलिए इस अवधि में किसी भी नए और संवेदनशील कार्य को शुरू करने से बचना चाहिए।

शुभ समय
अभिजित मुहूर्त 11:50 ए एम से 12:39 पी एम। विजय मुहूर्त 02:16 पी एम से 03:05 पी एम। अमृत काल रात्रि 12:02 ए एम 22 सितम्बर से 01:48 ए एम 22 सितम्बर तक। रवि योग पूरे दिन।

अशुभ समय
राहुकाल सुबह 07:40 ए एम से 09:11 ए एम। विडाल योग सुबह 06:09 ए एम से रात्रि 12:31 ए एम 22 सितम्बर तक।

दिशा शूल आज पूर्व दिशा में है
सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। यदि आज पूर्व दिशा की यात्रा करना अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पूर्व शीशे में अपना चेहरा देखकर निकलें, थोड़ा सा कच्चा दूध या घी खाकर निकलें, और पूर्व दिशा के दिक्पाल देवराज इंद्र का ध्यान करते हुए इस शास्त्रोक्त श्लोक का तीन बार पाठ करें।
प्राच्यां पुरन्दरो देवो दिशापालो व्यवस्थितः।
तं प्रणम्य गमिष्यामि सिद्धिं प्राप्स्यामि निश्चितम्।।
इस श्लोक का महत्व यह है कि पूर्व दिशा के स्वामी देवराज इंद्र यानी पुरंदर हैं। यात्रा से पूर्व उन्हें प्रणाम करने से पूर्व दिशा के दिशा शूल का दोष समाप्त हो जाता है और आपकी यात्रा सुरक्षित, निर्विघ्न और सफल रहती है।

आज का विशेष उपाय
आज सोमवार, दशावतार व्रत और पूरे दिन रवि योग का शुभ संयोग है। भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु की कृपा से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से यह सरल उपाय अवश्य करें। सुबह स्नान के पश्चात तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और अक्षत यानी साबुत चावल मिला लें। इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाकर दशावतार का स्मरण करें। साथ ही घर में बनी पहली रोटी पर थोड़ा सा सफेद मक्खन या मिश्री लगाकर किसी गाय को आदरपूर्वक खिलाएँ। इस उपाय से चंद्र दोष शांत होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख शांति का वास होता है।

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