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ईश्वर का असीम धन्यवाद सभी पूर्वजों को नमन जिनका आशीर्वाद ही मेरी शक्ति है
01/10/2026

ईश्वर का असीम धन्यवाद

सभी पूर्वजों को नमन जिनका आशीर्वाद ही मेरी शक्ति है

At SRCC DELHI MODI JI SAYS ABOUT HOMOEOPATHY It’s very great to see prime minister Modi ji narrating his Knowledge about...
06/09/2026

At SRCC DELHI MODI JI SAYS ABOUT HOMOEOPATHY
It’s very great to see prime minister Modi ji narrating his Knowledge about HOMOEOPATHY, his words sense us not fully correct as well as not fully incorrect because if a doctor has mastery over
case taking
knowledge of disease
pathology
Selection of medicine
Selection of potency
Selection of dose
Then there may not any kind of even temporary aggravation

As a student of this great healing scientific system I appreciate Modi ji for his support to our pathy whatsoever in any context
now it’s our duty to prove ourselves by circulating HOMOEOPATHY to every needful common people with right section of medicine without any aggravation

सभी शिक्षकों को सादर समर्पित
05/09/2026

सभी शिक्षकों को सादर समर्पित

14/08/2026
*"मैं व्यर्थ नहीं जिया हूँ" –* डॉ. सैमुअल हैनिमन की अंतिम यात्रा2 जुलाई 1843 की एक शांत सुबह थी, जब पेरिस की धरती पर एक ...
03/07/2026

*"मैं व्यर्थ नहीं जिया हूँ" –* डॉ. सैमुअल हैनिमन की अंतिम यात्रा

2 जुलाई 1843 की एक शांत सुबह थी, जब पेरिस की धरती पर एक महान आत्मा ने अंतिम सांस ली। यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं था – यह थे डॉ. सैमुअल हैनिमन, होम्योपैथी के जनक, जिन्होंने चिकित्सा की दुनिया को एक नई दृष्टि दी।

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शुरुआत एक पीड़ा से

24 मार्च 1843 को डॉ. हैनिमन को ब्रोंकाइटिस हो गया। यह रोग धीरे-धीरे उनकी शक्ति को समाप्त करने लगा। लेकिन यह वही हैनिमन थे, जिन्होंने जीवन भर रोग से जूझते रोगियों को जीवनदान दिया था – अब वे खुद रोग के सामने खड़े थे।

छह हफ्तों तक उन्होंने अपना इलाज स्वयं किया – कभी ओपियम, कभी बेलाडोना, और फिर सल्फर जैसी होम्योपैथिक औषधियों से। ये वही औषधियाँ थीं जिनकी शक्ति उन्होंने जीवन भर परखी थी।

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रोग की गहराई

उनकी बीमारी ने कई रूप लिए –

कठिन साँस लेना

पित्तीय अतिसार (bilious diarrhea)

बीच-बीच में बुखार

कमजोरी और बेहोशी की स्थिति

ओपियम उन्हें गहरी नींद, अवसाद और कब्ज के लिए दी गई।
बेलाडोना उनके बुखार और मानसिक भ्रम के लक्षणों के लिए चुनी गई।
सल्फर, उनके अनुसार, पुरानी बीमारियों की जड़ यानी "मiasm" पर काम करने वाली औषधि थी – एक तरह से आत्मा की गहराई तक पहुँचने वाली दवा।

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जब हाथ कांपने लगे

जब उनकी शक्ति क्षीण होने लगी, तब उन्होंने अपनी पत्नी मेलानी और चिकित्सक डॉ. चात्रां को निर्देश दिए कि कैसे उनका इलाज करना है। उन्होंने आखिरी दम तक अपना "इलाज" खुद देखा – वह भी उन्हीं सिद्धांतों पर जिन पर उन्होंने जीवन समर्पित किया।

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अंतिम शब्द – एक आत्मसंतोष की गूंज

2 जुलाई को, मृत्यु की चुप्पी से पहले, उन्होंने धीमी लेकिन गहरी आवाज़ में कहा –
"Non inutilis vixi" –
"मैं व्यर्थ नहीं जिया हूँ"।

यह एक ऐसे इंसान की आवाज थी जो जानता था कि उसने दुनिया को एक नई चिकित्सा प्रणाली दी है, लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है।

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शवयात्रा और सम्मान

पहले उनका अंतिम संस्कार Montmartre Cemetery में हुआ। लेकिन जब अमेरिका से उनके भक्तों ने चंदा इकट्ठा किया, तब उन्हें और सम्मान के साथ Père Lachaise Cemetery में पुनः दफनाया गया – एक भव्य समाधि के साथ, जैसा एक क्रांतिकारी को मिलना चाहिए।

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हैनिमन की विरासत

उनकी मृत्यु एक अंत नहीं, एक आत्मिक जागृति थी। उन्होंने जो चिकित्सा दी – वह आज भी जीवित है। होम्योपैथी आज भी दुनिया भर में लोगों के दर्द का इलाज कर रही है।

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🕯️ डॉ. सैमुअल हैनिमन – आपने सच कहा था... आप व्यर्थ नहीं जिए।
आपका हर शब्द, हर दवा, हर सिद्धांत आज भी लाखों जिंदगियों को छू रहा है।

मृत्यु नहीं अंत है उनका, वो हर बूंद में ज़िंदा हैं,
हर दुआ, हर सुधार में… आज भी उनका सपना जिन्दा है।"

🕊️ श्रद्धांजलि उस आत्मा को, जिसने चिकित्सा को आत्मा दी।

होम्योपैथी के इस प्रकाश स्तंभ को विनम्र श्रद्धांजलि। 🌸

17/05/2026
17/05/2026

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विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) हर साल 17 मई को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 'साइलेंट किलर' कहे ज...
17/05/2026

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day)

हर साल 17 मई को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 'साइलेंट किलर' कहे जाने वाले हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) के प्रति लोगों को जागरूक करना, नियमित जांच को बढ़ावा देना और समय पर इसके बचाव के उपायों को अपनाना है।

मुख्य आकर्षण और विवरण (2026)इस वर्ष की थीम: वर्ष 2026 के लिए विश्व उच्च रक्तचाप लीग (WHL) द्वारा निर्धारित थीम "उच्च रक्तचाप को एक साथ नियंत्रित करें" (Controlling Hypertension Together) है।

साइलेंट किलर: उच्च रक्तचाप के शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन यह लंबे समय में दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।

भारत में स्थिति: भारत में लगभग 22 करोड़ वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं और अधिकांश को तो इस बीमारी का पता ही नहीं होता।

बचाव और नियंत्रण के उपायनियमित जांच: 120/80 mmHg से अधिक रक्तचाप को सामान्य नहीं माना जाता। इसलिए नियमित रूप से अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या घर पर बीपी मॉनिटर से जांच करते रहें।खान-पान में बदलाव: अपने आहार में नमक की मात्रा कम करें और ताजे फल, हरी सब्जियां तथा साबुत अनाज शामिल करें।

सक्रिय जीवनशैली: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम या योग करें।तनाव मुक्त रहें: योग, ध्यान (Meditation) और पूरी नींद लेकर तनाव को दूर रखें

जागरूकता अभियान: इस अभियान के आधिकारिक बैनर और टूलकिट के लिए विश्व उच्च रक्तचाप लीग का उपयोग करें।

Address

6, Krown Complex, Community Centre, Phase – II, Ashok Vihar, Pin–
Delhi
110052

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