Piyau Majriya

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खेतों से विदेशों तक🌾 | Piyau Majriya - Vaidic Bhaishjyalya | ग्रामवैद्य विधि से नाभि तेल, केश तेल, च्यवनप्राश, बादाम पाक, शिलाजीत, त्रिफला आदि | शास्त्रोक्त पारंपरिक ज्ञान पर आधारित विशुद्ध आहार व स्वास्थ्य उत्पाद।

24/08/2026

थोड़ा चिंतन मनन जरूर करें 🙏
मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि बहन बेटियों को घर के आसपास या सुरक्षित जगह पर काम ढूंढ कर दें 🙏
जीवन चलाने के लिए रोजी रोटी कमाना जरूरी भी है मजबूरी भी है, पर सुरक्षा और आत्म सम्मान उससे भी ज्यादा जरूरी है। किसी को सहयोग भले मत करो मगर उसे परेशान और निराश मत करो🙏

भावप्रकाश शास्त्र - श्लोक 1 से 16शुद्ध संस्कृत + English + सरल हिंदी Piyau Majriya - ओझल धरोहर सीरीज01. प्रणम्य परमात्मा...
18/08/2026

भावप्रकाश शास्त्र - श्लोक 1 से 16

शुद्ध संस्कृत + English + सरल हिंदी
Piyau Majriya - ओझल धरोहर सीरीज

01. प्रणम्य परमात्मानं भिषजां सुखहेतवे। क्रियते रावहर्षोण भाषा भावार्थबोधिनी
Having bowed to the Supreme Soul, for the happiness of physicians, this commentary named Bhavartha-bodhini is composed in simple language.
परमात्मा को प्रणाम करके, वैद्यों और रोगियों के सुख के लिए भाव मिश्र जी सरल भाषा में यह ग्रंथ बना रहे हैं।

02. गजमुखममरप्रवरं सिद्धिकरं विघ्नहर्तारम्। गुरुमवगम नयनप्रदं मिष्टकरी मिष्टदेवतां वन्दे
I bow to Lord Ganesha (elephant-faced, best among gods, giver of success, remover of obstacles), to my Guru (giver of the eye of knowledge), and to my beloved deity.
गजमुख गणेश जी जो सिद्धि देते हैं, विघ्न हरते हैं, और ज्ञान की आँख देने वाले गुरु जी को प्रणाम !

03. आयुर्वेदागमनं क्रमेण येनाभवद् भूवि। प्रथमं लिख्यामि तमहं नानातन्त्राणि संहृत्य
How Ayurveda descended on this earth in sequential order - I shall write that first, after collecting from various treatises.
धरती पर आयुर्वेद क्रम-क्रम से कैसे आया, वो इतिहास मैं अनेक ग्रंथों को देखकर पहले लिखता हूँ।

04. आयुर्हिताहितं व्याधेर्निदानं शमनं तथा। विद्यते यत्र विद्वद्भिः स आयुर्वेद उच्यते
That where knowledge of beneficial and harmful life, cause of diseases and their cure is present, is called Ayurveda by the learned.
जिसमें हित आयु, अहित आयु, रोग के कारण और रोग का इलाज बताया हो - वही आयुर्वेद है !

05. अनेन पुरुषो यस्मादायुर्विन्दति वेत्ति च। तस्मान्मुनिवरैरेष आयुर्वेद इति स्मृतः
Because by this man attains lifespan and knows it, therefore great sages called it Ayurveda.
जिससे मनुष्य आयु को पाता है और जानता है, इसलिए बड़े मुनियों ने इसे आयुर्वेद कहा।

06. ब्रह्मा स्मृत्वाऽऽयुर्वेदं शतलक्षश्लोकम्। व्यधात् स च ततो दक्षं सुकर्माणम्
Brahma, remembering Ayurveda of one lakh shlokas, composed it and then taught it to Daksha who was skilled in action.
ब्रह्मा जी ने एक लाख श्लोक का आयुर्वेद याद करके बनाया और फिर काम में चतुर दक्ष प्रजापति को पढ़ाया।

07. निखिलं हि दक्षः पठित्वा कृतकृत्यममन्यत। ततः सूर्यसुतावश्विनौ पुनर्दक्षादधीतवन्तौ
Daksha, having studied the whole, considered himself fulfilled. Then the two Ashwini Kumars, sons of Sun, studied it from Daksha.
दक्ष ने पूरा पढ़कर खुद को धन्य माना। फिर सूर्य के पुत्र अश्विनी कुमारों ने दक्ष से इसे पढ़ा।

08. तौ च संहितां चक्रतुर्यशःकामौ तस्याः प्रथामिच्छन्तौ । ततो रुद्रो भैरवरूपी ब्रह्मशिरश्छिच्छेद कुपितः
Desiring fame and expansion, they made their own Samhita. Then Rudra in Bhairava form, being angry, cut off Brahma's head.
यश की इच्छा से दोनों ने अपनी संहिता बनाई। तभी गुस्से में भैरवरूपी रुद्र ने ब्रह्मा जी का सिर काट दिया।

09. ततस्तच्छिरः संधातुं देवा अश्विनौ प्रार्थयामासुः। ताभ्यां तत् संहितं ब्रह्मा तुष्टस्ताभ्यां वरं ददौ
Then to rejoin that head, gods prayed to Ashwinis. When they rejoined it, Brahma being pleased gave them a boon.
सिर जोड़ने के लिए देवताओं ने अश्विनीकुमारों से प्रार्थना की। उन्होंने जोड़ दिया तो ब्रह्मा जी खुश होकर वर देने लगे।

10. यज्ञे वो भागो भविष्यतीति तौ यज्ञभागिनौ कृतौ । ताविन्द्रादीन् सुरान् सर्वान् सहसा शरणागतान्
"You will have a share in Yajna" - thus he made them partakers of Yajna. They, to all gods like Indra who suddenly came for refuge...
ब्रह्मा ने कहा - यज्ञ में तुम्हारा भी भाग होगा! इस तरह वे यज्ञ के भागी बने।

11. देवासुरसंग्रामे व्रणितान् चक्रतुः क्षणात्। निरुजस्ततस्ताविन्द्राद्यैः पूजितौ पूज्यतमौ भिषजौ ॥११॥
In the war of Devas and Asuras, they instantly healed all wounded gods. Hence they were worshipped by Indra etc. as most venerable physicians.
देव-असुर युद्ध में घायल देवताओं को पल भर में ठीक कर दिया, इसलिए इंद्र आदि ने उन्हें सबसे बड़ा वैद्य माना।

12. पूष्णो दन्तान् पतितान् भगस्य नयने हते। चन्द्रस्य राजयक्ष्माणं तावेव समशोधयताम्
They restored Pushan's fallen teeth, Bhaga's destroyed eyes, and cured Chandra's Rajayakshma (TB).
पूषा के गिरे दांत, भग के फूटे नेत्र और चंद्रमा का राजयक्ष्मा (TB) रोग इन्हीं दोनों ने ठीक किया।

13. भग्नमूरुं विश्पलायां ऋज्राश्वस्याक्षिणी च्युतम्। शिरो रहोः स्वर्भानोस्तत्कण्ठे सन्दधतुस्तौ
They joined Vishpala's broken thigh, Rijuashva's fallen eyes, and fixed Rahu's head to his neck.
विश्पला की टूटी जांघ, ऋज्राश्व की गिरी आँखें और राहु का सिर धड़ से इन्होंने ही जोड़ा।

14. च्यवनं वृद्धमप्येतौ कृतवन्तौ नवं पुनः। एतादिभिस्तथा कर्मभिर्देवानां पूज्यतमौ भिषजौ
They made old Chyavana young again. By such deeds, they became most worshippable physicians of gods.
बूढ़े च्यवन ऋषि को फिर से जवान बना दिया! ऐसे कामों से वे देवताओं के सबसे पूज्य वैद्य बने।

15. यशस्विनौ ताविन्द्रो वीक्ष्य स्वकर्मफलेच्छया। चमत्कृत्याय वैद्यकशास्त्रमश्विभ्यां ययाचे सः
Seeing their fame, Indra desiring fruit of his own deeds, with amazement asked for Ayurveda Shastra from Ashwinis.
उनके यश को देखकर इंद्र ने अपने काम के लिए चमत्कार से भरा आयुर्वेद शास्त्र अश्विनीकुमारों से मांगा।

16. सत्यप्रतिज्ञस्त्विन्द्राय प्रार्थिताभ्यां महात्मभिः। यथाधीतं तथैवाशु ताभ्यां दत्तं निजं हि तत्
Being true to their promise, those great souls, being prayed by Indra, quickly gave to Indra as they had studied.
सत्य प्रतिज्ञा वाले उन महात्माओं ने इंद्र के प्रार्थना करने पर जैसा पढ़ा था वैसा ही तुरंत इंद्र को दे दिया।

स्रोत: मूल संस्कृत - भाव मिश्र कृत भावप्रकाश (Public Domain)
Not - सरल अनुवाद: Piyau Majriya टीम - जनहितार्थ
संस्कृत अंग्रेजी की त्रुटियां सुधार और प्रूफ रीडिंग के लिए की मदद ली गई है। फिर कोई चूक रह गई हो तो plz अवगत करवाएं

000 - भावप्रकाश 10,268 श्लोक महाग्रंथभाव प्रकाशः 10,268 श्लोक, आचार्य भावमिश्र - 16वीं शताब्दी, लघुत्रयी में प्रमाणिकBha...
18/08/2026

000 - भावप्रकाश 10,268 श्लोक महाग्रंथ

भाव प्रकाशः 10,268 श्लोक, आचार्य भावमिश्र - 16वीं शताब्दी, लघुत्रयी में प्रमाणिक
Bhav Prakash - 10,268 Shlokas, Author
Acharya Bhava Mishra - 16th Century, Part of Laghutrayi

हिंदी अनुवाद : भाव प्रकाश में 10,268 श्लोक, 500 साल पुराना, आयुर्वेद के 3 सबसे प्रमाणिक ग्रंथों में से एक !

त्रयः खंडाः - पूर्व, मध्य, उत्तर 80+ अध्याय, निघण्टु सहित
3 Khandas - Purva, Madhya, Uttara - 80+ Chapters with Nighantu (Herbs details)
हिंदी अनुवाद: 3 खंड, 80+ अध्याय, जड़ी-बूटियों का पूरा वर्णन !

हमारा संकल्पः रोज 10–20 श्लोक 750+ दिन तक Piyau Majriya पर!

संस्कृत अंग्रेजी की त्रुटियां सुधार और प्रूफ रीडिंग के लिए AI की मदद ली गई है।
फिर कोई चूक रह गई हो तो plz अवगत करवाएं
स्रोतः भावप्रकाश सटीक 1949(Public Domain)

17/08/2026

नमस्कार सभी फैंस के लिए विशेष सूचना।
आपकी पसंद की सारी सामग्री अब
Ojhal Dharohar
पर उपलब्ध है

28/05/2026

अलविदा बसीर बद्र साहब ।
आप हमारी यादों में हमेशा रहेंगे।

09/04/2026

किसने बनाया ये मुजस्समा 🤔🤩

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