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Manish vashist Treatment with nature and Ayurveda

Jinki kamar l4 l5 me pain hai wo genhu ke aate ko gram karke brown hone se pahle thoda pani daal ke patla ghol bna ke ut...
11/07/2026

Jinki kamar l4 l5 me pain hai wo genhu ke aate ko gram karke brown hone se pahle thoda pani daal ke patla ghol bna ke utar lo pakana nhi garam sa karna hai or sahad mila ke din me 2 time 10 din khao . Phir btana relief hua ke nhi .
Samb sda shiv

11/07/2026
22/03/2026

बरगद् से रोग़ ठीक क़रे और like करके अपने भाईं क़ा साथ दे

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29/07/2023

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20/07/2023

🚩‼️ ओ३म् ‼️🚩

🔥प्राण किसे कहते है ?
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हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है उसका नाम प्राण है। प्राण जड वस्तु है।शरीर के सभी अंग प्राण से ही शक्ति पाकर अपने काम करते है। प्राण से ही भोजन का पाचन रस,रक्त ,मांस,मेद आदि धातु ओ का निर्माण , व्यर्थ पदार्थों का बाहर निकलना,उठना ,बैठना ,चलना ,बोलना ,चिन्तन ,मनन ,ध्यान आदि सब स्थूल व सूक्ष्म क्रिया होती है।प्राण यदि बलवान है तो शरीर के सभी अंग ठीक से कार्य करते है और यदि निर्बल है तो शरीर रोगी हो जाताहै। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राण को शुद्ध खानपान ,प्रगाढ निद्रा ,ब्रह्मचर्य व प्राणायाम के द्वारा बलवान बनाना चाहिये ।
प्राण दश होते है।

१-प्राण- इसका स्थान नासिका से हृदय तक है। आंख ,नाक,कान मुख आदि इसी की सहायता से काम करते है।

२- अपान- इसका स्थान नाभि से पैर तक होता है। मल,मूत्र , प्रजनन आदि क्रिया इसकी सहायता से होती है।

३- समान- इसका स्थान हृदय से नाभि तक होता है।यह खाये अन्न को पचाने तथा उससे रस ,रक्त आदि धातु बनाने का कार्य करता है।

४- उदान- यह कण्ठ से सिर तक रहता है। बोलना,उल्टियाँ करना इसी के कारण होता है।

५- व्यान- यह सारे शरीर मे रहता है। हृदय से मुख्यत:१०१ नाडिया निकलती है उनकी अनेक शाखा है।सारे शरीर मे रक्त संचार का कार्य यही करता है।

६- नाग- यह कण्ठ से मुख तक रहता है।डकार ,हिचकी इसी से होती है।

७- कूर्म- इसका स्थान नेत्र गोलक है।गोलको को उपर नीचे दांये बांये यही घुमाता है।आंसू भी इसी से आते है।

८- कृकल- यह मुख से हृदय तक रहता है।भूख ,प्यास ,जंभाई इसी से उत्पन्न होती है।

९- देवदत्त- यह नासिका से कण्ठ तक होता है।इससे छींक , आलस्य , निद्रा आदि आती है।

१०- धनञ्जय- यह सारे शरीर मे व्यापक रहता है।इसका कार्य शरीर के अवयवों को खींचे रखना ,मांसपेशियो को सुंदर बनाना है।

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🕉️🚩 आज का वेद मंत्र 🚩🕉️

🔥ओ३म् योगे योगे तवस्तरम् वाजे वाजे हवामहे । सखाय इंद्र मूतये।। (सामवेद १६३)

💐 अर्थ: प्रत्येक सुख व दुख में परमेश्वर का सखा भाव से स्मरण करें, जिससे जिससे संपत्ति में हम अभिमत होकर आत्महानि न कर सकें और विपत्ति पर निराश होकर आत्मग्लानि ना कर सके

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19/07/2023

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