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नाड़ियाँ क्या हैं? हमारे शरीर में प्राण का प्रवाहयोग दर्शन में नाड़ी का अर्थ है— प्रवाह या धारा।योग ग्रंथों के अनुसार सू...
30/09/2026

नाड़ियाँ क्या हैं? हमारे शरीर में प्राण का प्रवाह
योग दर्शन में नाड़ी का अर्थ है— प्रवाह या धारा।
योग ग्रंथों के अनुसार सूक्ष्म शरीर में लगभग 72,000 नाड़ियों का वर्णन मिलता है। इन्हें भौतिक शरीर की नसों के समान नहीं माना जाता, बल्कि प्राण के प्रवाह के सूक्ष्म मार्ग के रूप में समझाया जाता है।
इनमें तीन नाड़ियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई हैं—
इड़ा नाड़ी
इड़ा को शरीर के बाईं ओर से संबंधित माना जाता है और इसे चंद्र/शीतल ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
यह मानसिक शांति, अंतर्मुखता और मानसिक गतिविधियों से जोड़ी जाती है।
पिंगला नाड़ी
पिंगला को दाईं ओर से संबंधित माना जाता है और इसे सूर्य/ऊष्मा ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
इसे सक्रियता, शारीरिक कार्य, पाचन और बाहरी गतिविधियों से जोड़ा जाता है।
सुषुम्ना नाड़ी
सुषुम्ना को इन दोनों के बीच स्थित मुख्य आध्यात्मिक मार्ग माना गया है। योग परंपरा में इसे मूलाधार से आज्ञा/सहस्रार की ओर जाने वाले सूक्ष्म मार्ग के रूप में वर्णित किया जाता है।
नाड़ियों और श्वास का संबंध
योग परंपरा के अनुसार हमारी नासिकाओं में श्वास का प्रवाह हमेशा समान नहीं रहता।
जब बाईं नासिका से श्वास अधिक प्रवाहित हो, तो इसे इड़ा की प्रधानता से जोड़ा जाता है।
जब दाईं नासिका से प्रवाह अधिक हो, तो पिंगला की प्रधानता मानी जाती है।
और जब दोनों ओर श्वास का प्रवाह संतुलित हो, तो इसे सुषुम्ना की अवस्था से जोड़ा जाता है।
कहा जाता है कि यह प्रवाह लगभग 60–90 मिनट के अंतराल में बदलता रहता है।
क्या हम इसे संतुलित कर सकते हैं?
योग में आसन और प्राणायाम के माध्यम से श्वास और ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने की साधना की जाती है।
इसी विचार का एक सुंदर उदाहरण है नाड़ी शोधन प्राणायाम, जिसमें दोनों नासिकाओं के माध्यम से श्वास का संतुलित अभ्यास किया जाता है।
अंततः नाड़ियों की यह पूरी अवधारणा हमें एक महत्वपूर्ण बात सिखाती है—
श्वास पर ध्यान → मन पर ध्यान → स्वयं के प्रति जागरूकता।
यह विवरण योग की पारंपरिक अवधारणाओं पर आधारित है; नाड़ियों को आधुनिक शरीर-विज्ञान की नसों के समान नहीं समझना चाहिए।
संदर्भ: Asana Pranayama Mudra Bandha — Swami Satyananda Saraswati

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